सूखी घास के ढेर को शरारा मुबारक हो,
अंधो को रोशनी का नजा़रा मुबारक हो।
किसने उँडेल दी है कालिख आसमाँ पर,
गर्दिश मे डुबता वो सितारा मुबारक हो।
पाँव निकल पडे तो रास्ते अपाहिज हो गये,
लो बैसाखियो का सहारा मुबारक हो।
फूलो के सर क़लम कर दिये पत्तो की धार ने,
अहल-ए-चमन को लहू का फुहारा मुबारक हो।
दो गज़ ज़मीन [...]
Archive for January, 2008
मुबारक हो। / श्रीकृष्ण राऊत
Posted in Uncategorized on January 28, 2008 | Leave a Comment »
ग़ज़ल /श्रीकृष्ण राऊत
Posted in Uncategorized on January 28, 2008 | Leave a Comment »
हर मुश्किल का हल हो जैसे
आज नही तो कल हो जैसे
आबाद हो गयी दिल की दिल्ली
घर छोटासा, महल हो जैसे
महकी महकी बाते उसकी
पके आम के फल हो जैसे
सूना सूना लगे भीड मे
शहर नही जंगल हो जैसे
यही ठहरती सुई घडी की
तेरी याद का पल हो जैसे
मेरे ऐब भी प्यारे तुझको
तू माँ का आँचल हो जै